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मारण प्रयोग से ऱक्षा का अचूक विधान

मित्रों आजकल अभिचार करने का या मारण करने का क्रेज काफी बढ़ गया है । हर दुधमुहा साधक अभिचार करने की धमकी देता है तो एक ऐसा अचूक प्रयोग जिससे अभिचार, करने वाले पर खुद पलट जाता है। और लौटा हुआ अभिचार कहीं ज्यादा खतरनाक भी हो जाता है। मंत्र- ॥ॐ नमो आदेश गुरु का, एक ठो सरसों सोला राई, मोरो पठवल कोरो जाई। खाय खाय पड़ै मार, जे करै ते मरै। उलट विद्या ताही पर पड़ै। शब्द साँचा पिण्ड काँचा तो हनुमान का मंत्र साँचा फुरो मंत्र ईश्वरी वाचा दुहाई माता अँजनी की॥ हथेली में एक दाना पीला सरसो, 16 दाना राई और 3 डली नमक लेकर मुट्ठी बंद करके ये मंत्र 7 बार पढ़ें और हर बार एक फूँक मारें फिर पीड़ित (या स्वयं) के सर से 7 बार उल्टा उबारकर जलती आग में डाल दें। इसे सिद्ध करने की जरूरत नहीं स्वयं सिद्ध है फिर भी चाहें तो किसी ग्रहण पर 1 माला गुग्गुल की धूप जलाकर कर सकते हैं।

खून की उल्टी करके मरेंगे सभी शत्रु, करें ये मारण प्रयोग

प्रत्यक्ष शत्रु से निपटना आसान होता है किन्तु हमारे कई अप्रत्यक्ष शत्रु होते हैं जो सामने मित्रता पूर्ण व्यवहार रखते हैं किन्तु हमारे पीठ पीछे हमे नुकसान पहुंचाते हैं व हमारी छवि बिगाड़ते रहते हैं, और हमारे परिवार के सदस्यो पर अपनी शत्रुता निकालते हैं। ऐंसे शत्रुओं पर यह मारण प्रयोग करने पर सिर्फ शत्रु ही नहीं बल्कि उसके परिवार के सदस्य पर भी प्रभाव होता है। शत्रु को हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज, कैंसर, क्षय रोग, लकवा, पागलपन, विक्षिप्त बनाने, आपसी विवाद कराने, वाहन दुर्घटना, सूखी लगाना, धन हानि, व्यापार मे नुकसान पहुंचाकर बदला लेने के लिए इन तांत्रिक प्रयोगो को करें। प्रयोग विधि   विनियोग मंत्र:- ॐ अस्य श्री आर्द्रपटिमहाविद्यामंत्रस्य दुर्वासा ऋषिर्गायात्री छंद: हुं वीजं स्वाहा शक्ति: मम अमुकशत्रुनिग्रहर्थे जपे विनियोग: अपने शत्रु के पैर की मिट्टी लेकर उसका एक पुतला वनाएं। फिर कृष्ण पक्ष की अष्टमी से लेकर चतुर्दशी तक प्रतिदिन 108 बार शत्रु का नाम (अमुक की जगह) लेकर ऊपर दिया गया मंत्र का जाप करें। इसके बाद चतुर्दशी को जो आपने शत्रु का पुतला बनाया था उसको सामने रखें फिर एक बकरे की बलि...

महाकाली की चौकी भेजें, शत्रु मारण

महाकाली की चौकी भेजने की प्रचीन गुप्त साधना महाकाली की चौकी भेजकर शत्रु मारण की विधि विडियो मे बताई गई है। पूरी विधि सबधानीपूर्वक देखकर ही उपयोग मे लाएँ एवं गुरु के मार्गदर्शन के बिना कोई भी साधना न करें अन्यथा आप पागल हो सकते हैं या आपकी मृत्यु भी हो सकती है यदि गलती हुई तो उसका उल्टा परिणाम होता है। इसलिए इस मंत्र को मज़ाक मे भी न पड़ें | मंत्र इस प्रकार है:- “ॐ नमो आदेश गुरु का आदेश काली काली महाकाली इन्द्र की बेटी ब्रम्हा की साली चाम की गठरी हाड़ की माला भजो आनन्द सुंदरी बाला भरपूर वसन करले उठाई काम क्रन्ति कलिका आई लुच्ची मोहन भोग भेट कड़ाही जहा भेजा वहा जाई कष्ट दुखो से लेव बचाई सभी देत्यन को मार भगाई आदि अंत तू रही सहाई में पूत तू मेरी माई सब दुखन से लेव बचाई गुरु की शक्ति हमारी भक्ति फुरे मंत्र दोहाई काली की ईश्वरो वाचा”                                                                        ...

तांत्रिक क्रियाओं के प्रकार एवं प्रभाव

क्या आपने सुना है की एक महिला किसी अज्ञात से बाते कर रही है, जो हमे नही दिखाई देता। एक इंसान को चारों और सांप ही सांप दिखाई देते है, किसी को रोज सपनो मै कोई सफेद कपड़े मै दिखाई पढ़ता, कोई व्यक्ति जब तक घर से बाहर रहता खुश रहता है,लेकिन घर मे आते ही गुस्सा करने लगता है। ये बातें अजीब लगती है,आप क्या हर कोई जब तक इन हादसों का शिकार नही हो जाता तब तक इन सबको मानता नहीं है।अक्सर ये सब हमारे कुछ पूर्व जन्म के दोष, आपकी कुंडली मै काल सर्प, श्रापित दोष, आदि के कारण होते हैं किन्तु कुछ तांत्रिक क्रिया द्वारा भी कराया जाता है । जन्म के समय जब राहू और केतु के साथ शनि की भी नकारात्मक भूमिका हो जाती है, शुभ ग्रहो के साथ जब ये ग्रह युति बना लेते है तब जिंदगी को उथल पुथल कर देते हैं। इन इंसानो पर बाहरी क्रियाओ का असर जल्दी होता है।विद्वेषण जैसी खतरनाक तांत्रिक क्रियाओं द्वारा पति-पत्नि में झगडे करवा दिए जाते हैं फिर वे ही एक दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं। ताडन जैसी भयानक तांत्रिक क्रियाओं द्वारा व्यक्ति को बीमार कर दिया जाता हैं। फिर बीमारी ही पकड में नहीं आती है अथवा इलाज करवा-करवा कर थक जाते हैं फिर...

तांत्रिक मारण क्रिया करने के आवश्यक नियम व सावधानी

हम जो दुनिया को देते हैं वो हमें एक न एक दिन बापस जरूर मिलता है, दुसरो के साथ जैंसा कर्म करेंगे वैसा एक दिन हमारे पास लौटकर आता है। यह प्रकृति का नियम है। इसलिए हमेशा अच्छा कर्म करें ताकि लौटकर जो आये वो अच्छा ही आये। तांत्रिक मारण क्रिया करते समय ये बात अवश्य ध्यान रखना चाहिए। 1. छोटे मोटे वाद विवाद, छोटी बातों के कारण शत्रु पर मारण प्रयोग कभी नही करना चाहिए।2. किसी भी व्यक्ति का नाम लेकर कभी मारण क्रिया नहीं करना चाहिए। क्योंकि हमारी जिंदगी CID के सीरियल की तरह होती है कभी कभी शक किसी पर करते हैं और आरोपी कोई और निकलता है। शक के आधार पर कभी किसी पर मारण प्रयोग न करें।3. अमुक की जगह “मम सर्व शत्रु” का प्रयोग करें। मारण मंत्र से उत्तपन्न हुई ऊर्जा/दैवीय शक्ति स्वयं ही आपके सभी शत्रुओं एवं विरोधियों को खोजकर समाप्त करती जाएगी। 4. जब कोई हमारा बारे मे अच्छा सोचता है तो उसके अंदर से सकारात्मक तरंगे निकलकर लगातार हमसे टकराती रहती हैं। जो हमे फायदा पहुंचाती रहती हैं, और जब कोई हमारे बारे मे बुरा सोचता है तो उसके अंदर से नकारात्मक तरंगे निकलकर हमसे टकराती रहती हैं। जो हमे लगातार हानि प...

काला भैरव मूठ भेजने की विधि

काला भैरव मूठ भेजने की विधि यहाँ काला भैरव मूठ भेजकर शत्रु मारण की विधि बताई जा रही है। पूरी विधि साबधानीपूर्वक पढ़कर ही उपयोग मे लाएँ एवं गुरु के मार्गदर्शन के बिना कोई भी प्रयोग न करें अन्यथा आप पागल हो सकते हैं या आपकी मृत्यु भी हो सकती है यदि गलती हुई तो उसका उल्टा परिणाम होता है। इसलिए किसी भी मंत्र को मज़ाक मे भी न पड़ें और सभी मारण प्रयोग को गुरु के मार्गदर्शन मे ही करें। किसी पर गलत प्रयोग न करें। प्रयोग विधि:  सबसे पहले मुर्दे की हांडी ले लो फिर यह भी ध्यान रखो की वो कहाँ जलाया जा रहा है। अब रात को वहां जाना है और उड़द की दाल उस चिता की आग में और उसी हांडी में भूनने है। ध्यान रहे इस प्रक्रिया में मंत्र जप चालु रहे। अब हांडी उतार लो और उसमे से भुने हुए और जले हुए उड़द अलग कर लो। केवल जले हुए उड़द लेकर २१ बार मंत्र से अभिमंत्रित करके अपने शत्रु को फेंककर मारो। बस अब आगे क्या होगा खुद देख लेना। कुछ ही समय मे आपके शत्रु का खेल खत्म हो जाएगा। ये सब प्रक्रिया गुरु के देखरेख में होनी चाहिए और सूर्योदय से पहले ही होना चाहिए। मंत्र इस प्रकार है:- ॐ नमो काला भैरो मसान वाला। चौसठ योगिन...

आकर्षण शक्ति बढ़ाने वाले 4 तांत्रिक तिलकों का रहस्य

महाज्ञानी रावण कई चीजों में पारंगत था। ज्योतिष शास्त्र में भी उसे महारत हासिल थी। तंत्र शास्त्र का भी वह महाज्ञाता था। इसी वजह से जो भी दशानन के संपर्क में आता था वह सहसा ही उससे मोहित हो जाता था।यह बहुत कम लोगों को पता होगा कि रावण का प्रभाव उसकी तांत्रिक साधना के बल पर था। रावण कई ऐसे उपाय भी करता था जिससे जो भी सामान्य इंसान उसे देखता था वह आकर्षित हो जाता था।रावण संहिता में कुछ ऐसे ही खास प्रकार के तांत्रिक तिलक की चर्चा की गई है। जो भी व्यक्ति यह तिलक लगाता है सहज ही लोग उसकी तरफ चले आते हैं। यहां जानिए कि कौन-कौन से हैं वह तांत्रिक तिलक 1. आप सफेद आंकड़े (अकवन) को छाया में सुखा लें। इसके बाद उसे कपिला गाय यानी सफेद गाय के दूध में मिलाकर उसे पीस लें फिर उसका तिलक लगाएं। ऐसा करने वाले व्यक्ति का समाज में वर्चस्व स्थापित हो जाता है।2. अपामार्ग के बीज को बकरी के दूध में मिलाकर उसे पीसकर उसका लेप बनाकर लगाएं। इस लेप को लगाने वाले व्यक्ति का समाज में आकर्षण काफी बढ़ जाता है। उसका कहा सभी लोग मानते हैं।3. दुर्वा घास के चमत्कार से तो आप पहले से ही वाकिफ होंगे। शास्त्रों म...