सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

तंत्र क्रिया द्वारा कोख बंधन से मुक्ति निदान के उपाय

तंत्र क्रिया द्वारा कोख बंधन से मुक्ति निदान के उपाय

ऐसा कई  बार सुनने में आता रहता है की तंत्र क्रियाओं के प्रयोग से किसी के घर में बच्चा नहीं हो रहा होता। वे लोग हर तरीके से स्वस्थ होते हैं – उनके पास एक स्वस्थ शरीर होता है, चुस्त दिमाग होता है और वे एक खुशाल ज़िन्दगी भोग रहे होते हैं, पर तब भी ऐसा होता है की कई बार चाहने पर भी यह कार्य पूर्ण नहीं हो पाता। चाहे स्त्री में कमी निकाली जाये या फिर पुरुष में सच तो ये होता है की दोनों ही स्वस्थ और सामर्थ के साथ होते हैं, फिर भी कार्य में कहीं दुविधा पाते हैं और इसी वजह से परेशानियों के अंदर धीरे धीरे फंसने लगते हैं। जब शादी के बाद थोड़े सालों तक बच्चा नहीं होता, तो फिर यह स्वाभाविक है की लोग पूछताछ करने लगते हैं की आखिर अभी तक संतान क्यों नहीं आयी है।
तंत्र क्रिया द्वारा कोख बंधन से मुक्ति निदान के उपाय
तंत्र क्रिया द्वारा कोख बंधन से मुक्ति निदान के उपाय
लोग अलग अलग तरह की बातें बनाने लगते हैं, कुछ कहते हैं की बीवी मेें कमी हैं कोई कहेगा पति नामर्दगी में है। अंत में घर में कलह मचनी पक्की हो जाती है और लोग आपस में परेशानी-वश चिंता के शिकार हो जाते हैं। कई डिप्रेशन में चले जाते हैं, कुछ मायूसी के मारे कोई और रास्ते ढूंढ़ने लगते हैं पर बहुत ही कम लोग ऐसे होते हैं जो यह अंदाज़ा लगा पाते हैं की शायद किसी ने कोई तांत्रिक क्रिया करके औरत की कोख बंद करवा दी है या फिर कोई और हानिकारक टोटका कर दिया है।
कई बार ऐसा हो जाने की मान्यता है और इसके लिए इलाज भी हैं, तो फिर घबराने की तो कोई बात रह नहीं गयी, आप बस इत्मीनान से हमारे द्वारा बताये हुए तरीके से उपाय करेंगे तो आपके या फिर आपके प्रिय सम्बन्धोयों के जीवन में एक नंन्हे-मुंहें बच्चे की किलकारियां घर में गूँज उठेंगी, आप भी अपने जीवन में गृहस्त जीवन के सबसे अमूल्य फलों में से एक को भोग पाएंगे और लुत्फ़ उठा पाएंगे। पहला तरीक़ा है स्त्री के रज से भीगा कपडा लें, हांथी की लींद लें, पलाश फूल के बीजे लें – इन सबके द्वारा लकड़ी को जलाकर शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी से कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तक हमारे निम्नलिखित मंत्र से ३००० बार हवन में आहुतियां दें।
मंत्र होगा –  “ओम ह्रीम श्रीम क्लीम बगलामुखी -स्त्री का नाम- जरायुपिंड स्तम्भय स्तम्भय की लय की लय क्लीम श्रीम ह्रीम ओम स्वाहा” इस मंत्र साथ जब आप ३०० आहुतियां दे चुके होंगे तो आप पाएंगे की स्त्री का रज ठीक हो जायेगा और वह अपनी कोख खुली पायेगी। उसकी गर्भ में कुछ भी दिक्कत अगर किसी तंत्र के कराने से आ रही है तो वह नहीं आएगी और आगे से वह एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देने के काबिल हो जाएगी। इस तरह के बहुत सी क्रियाएं हैं जिनसे लोग गलत कार्य कर देते हैं। आप अगर ऐसी क्रियाओं को समझने लगे तो बहुत समय बर्बाद हो जायेगा क्यूंकि अभिचार करने के बहुत से ढंग तंत्र और अन्य जगहों पे पाए जाते हैं। इन सब का लेखा-जोखा रख पाना तो मुमकिन नहीं होता हैं। कुछ आम लक्षणों से इन्हें पकड़ा जा सकता है, वे हैं –
औरत को मैथुन के बाद में कप कपी आती है। कई बार मैथुन से पहले भी यह कम्पन महसूस होता है।  तो फिर आप समझ लें की पक्का किसी ने कुछ किया धरा हुआ है, इसका इलाज क्या है ? इलाज है की आप ऐसा करें की काले तिल का तेल, मुर्गी का रक्त या फिर कबूतर का रक्त या मांस ले लें, “  ॐ क्रीं क्रीं क्रीं क्लीं फट स्वाहा “ मंत्र के साथ इनसे स्नान और मालिश करें। काला तिल और हींग मिलाकर शरीर के सारे छेदों पे लगाएं। सर और पेट पर ज़रूर लगाएं। अगर आप ऐसा पांच दिन तक करते हैं तो आपका बुरी ऊर्जा से बंधन टूट जाता है।
बताये हुए मंत्र की देवी महाकाली है और इसी मंत्र का रोज़ १०८ मंत्र जप करके हवं करें। ऐसा प्रयोग हमेशा एक औरत दूसरी औरत पे ही करती है और ऐसा होने के कारण जो भी कोख खोलने में मदद कर रहा है उसे सावधानी बारात कर करना चाहिए क्यूंकि ऐसा भी हो सकता है की यह साड़ी दिक्कत उसी पर ट्रांसफर हो जाये। मंत्र की देवी महाकाली एक उग्र देवी हैं सो यह ध्यान में रखें के गलतियां कोई भी नहीं होने पावें अन्यथा महाकाली से भी हानि हो सकती है।
हींग के साथ टिल का तेल पांच दिन तक पीने से गर्भ में अच्छा असर पड़ता है। अगर और अच्छा असर चाहिए और बच्चे नहीं होने के साथ कमर में दर्द भी रहता है तो फिर करेले का २५ ग्राम रस पांच दिन तक लगातार रोज़ पिएं तो दोनों तरफ फायदा होगा कमर दर्द में भी और बच्चे न होने की शिकायत में भी। अगर और भी छोटे उपाय चाहिए हों तो फिर ऐसा करें की पुराने गुड़ के साथ उरद की खीर खाएं। हर रोज़ जब सो के सवेरे सवेरे उठें तो फिर बासी मुंह एक लौंग साबुत पानी के साथ में निगल लें। अगर और अच्छा उपाय चाहें तो रोज़ ५० ग्राम हल्दी को पीस कर खा लें इससे भी गर्भवती बनने में बहुत मदद मिलती है।
इस तरह हमने आपके समक्ष आज कई तरह के उपाय रखें हैं कुछ करने में आसान हैं और सहजता से किये जा सकते हैं और कुछ थोड़े जटिल हैं और करने के लिए समय और परिश्रम और ध्यान मांगते हैं। सब का एक ही मकसद है और वो है की वे लोग जिनको बच्चे नहीं हो रहे बच्चे पैदा कर पाएं।
अगर आप पाते हैं की आपको हमारे द्वारा बताये हुए तरीके से काम करने में कोई दुविधा आ रही है या फिर कोई असमंजस में डालने वाली प्रक्रिया शुरू हो रही है तो आप ऐसा करें की हमसे से संपर्क करे और अपनी कुंडली दिखाएं और परामर्श करें, अगर और दिक्कत हो तो हमारे तांत्रिक गुरु जी से सही सलाह पाकर दीक्षा ले लें – मंत्र में जिससे आपके काम में आपको कोई दिक्कत नहीं आये। जब आप ध्यान से सब कार्यों को करेंगे तो आप पाएंगे की आपके काम को बनने से कोई नहीं रोक सकता – आप हर हालत में अपने लक्ष्य तक पहुंचेंगे और एक सफल, सुखद और समृद्ध गृहस्त जीवन व्यतीत कर पाएंगे।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

स्तंभन तंत्र प्रयोग:

स्तंभन तंत्र प्रयोग: स्तंभन क्रिया का सीधा प्रभाव मस्तिष्क पर पड़ता है। बुद्धि को जड़, निष्क्रय एवं हत्प्रभ करके व्यक्ति को विवेक शून्य, वैचारिक रूप से पंगु बनाकर उसके क्रिया-कलाप को रोक देना स्तंभन कर्म की प्रमुख प्रतिक्रिया है। इसका प्रभाव मस्तिष्क के साथ-साथ शरीर पर भी पड़ता है। स्तंभन के कुछ अन्य प्रयोग भी होते हैं। जैसे-जल स्तंभन, अग्नि स्तंभन, वायु स्तंभन, प्रहार स्तंभन, अस्त्र स्तंभन, गति स्तंभन, वाक् स्तंभन और क्रिया स्तंभन आदि। त्रेतायुग के महान् पराक्रमी और अजेय-योद्धा हनुमानजी इन सभी क्रियाओं के ज्ञाता थे। तंत्र शास्त्रियों का मत है कि स्तंभन क्रिया से वायु के प्रचंड वेग को भी स्थिर किया जा सकता है। शत्रु, अग्नि, आंधी व तूफान आदि को इससे निष्क्रिय बनाया जा सकता है। इस क्रिया का कभी दुरूपयोग नहीं करना चाहिए तथा समाज हितार्थ उपयोग में लेना चाहिए। अग्नि स्तंभन का मंत्र निम्न है। ।। ॐ नमो अग्निरुपाय मम् शरीरे स्तंभन कुरु कुरु स्वाहा ।। इस मंत्र के दस हजार जप करने से सिद्धि होती है तथा एक सौ आठ जप करने से प्रयोग सिद्ध होता है। स्तंभन से संबंधित कुछ प्रयोग निम्नलिखित है: 1....

गुप्त नवरात्रि के दिनों में तांत्रिक साधना

 जाने कैसे किये जाते है गुप्त नवरात्रि के दिनों में तांत्रिक साधना जिससे कोई भी किसी भी कार्य को सफल बना सकता है| अधिकतर लोग वर्ष में आने वाली चैत्र नवरात्रा और आश्विन या शारदीय, दो ही नवरात्रों के बारे में जानते हैं। लेकिन, बहुत कम लोगों को पता होगा कि इसके अतिरिक्त और भी दो नवरात्रा होती हैं जिन्हें गुप्त नवरात्रा कहा जाता है। इन दिनों देवी मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है तथा विभिन्न साधनाए भी उन्हें प्रसन्न करने के लिए की जाती है। तंत्र साधना के अनुसार गुप्त नवरात्रा में अपनाए गए प्रयोग विशेष फलदायक होते हैं और उनका फल भी जल्दी ही प्राप्त किया जा सकता है। जैसा कि गुप्त शब्द से ही विदित होता है कि यह नवरात्रा गुप्त होती है, अतः इस समय किए गए सभी उपाय भी गुप्त ही होने चाहिए।गुप्त एंव काली शक्तियों को प्राप्त करने हेतु यह श्रेष्ठ समय है और इस समय के सदुपयोग के लिए आपके लिए पेश है गुप्त नवरात्रि के तांत्रिक उपाय टोटके–१) तंत्र-मंत्र आरम्भ करने के पहले आप एक कलश की स्थापना करे मां देवी का नाम लेते हुए। देवी मां की मूर्ति को सिंदूर चढ़ाएं, धूप दीप करे, लाल फूल अ...

बगलामुखी शत्रु विनाशक मारण मंत्र

शत्रु विनाशक बगलामुखी मारण मंत्र मनुष्य का जिंदगी में कभी ना कभी, किसी न किसी रूप में शत्रु से पाला पड़ ही जाता है। यह शत्रु प्रत्यक्ष भी हो सकता है और परोक्ष भी। ऐसे शत्रुओं से बचने के लिए विभिन्न साधनों में एक अति महत्वपूर्ण साधना है मां बगलामुखी की साधना। देवी मां के विभिन्न शक्ति रूपों में से मां बगलामुखी आठवीं शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित है, जिसकी कृपा से विभिन्न कठिनाइयों और शत्रु से निजात पाया जा सकता है। कोई भी शत्रु चाहे वह जितना ही बलवान और ताकतवर हो अथवा छुपा हुआ हो, मां बगलामुखी के सामने उसकी ताकत की एक भी नहीं चल सकती। बगलामुखी शत्रु नाशक मंत्र की सहायता से शत्रु को पल भर में धराशाई किया जा सकता है, यह मंत्र है- ( १)  “ओम् हलीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय, जिह्वां कीलय बुद्धिम विनाशाय हलीं ओम् स्वाहा।” इस मंत्र साधना के पहले मां बगलामुखी को लकड़ी की एक चौकी पर अपने सामने स्थापित कर धूप दीप से उनकी पूजा-अर्चना करें। तत्पश्चात दिए गए मंत्र का प्रतिदिन एक हजार बार जाप करते हुए दस दिनों तक दस हजार जाप करें। नवरात्रा के दिनों में मंत्र जाप प्रारंभ करें और ...