कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके मित्र से ज्यादा शत्रु होते हैं। यह शत्रुता किसी भी कारण से हो सकती है। ऐसे व्यक्ति को शत्रुओं द्वारा हानि का भय भी सताता रहता है। ऐसे में वे शत्रुओं से मित्रता करना चाहते हैं। शत्रुओं के मन से शत्रु भाव मिटाना बड़ा ही कठिन है लेकिन नीचे लिखे मंत्र से यह संभव है। इस मंत्र के प्रभाव शत्रु आपका मित्र बन जाएगा और सपने में भी आपका अहित नहीं सोचेगा।
मंत्र
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई,
गोपद सिंधु अनल सितलाई
जप विधि
- सुबह नहाकर, साफ वस्त्र पहनकर भगवान राम का पूजन करें।
- पूर्व दिशा की ओर मुख करके, कुश के आसन पर बैठें और तुलसी की माला से इस मंत्र का जप करें।
- कम से कम 5 माला का जप अवश्य करें।
- कुछ ही दिनों में आपके शत्रु, मित्र बन जाएंगे।
- मंत्र जप का समय, आसन, आसन एक ही हो तो मंत्र जल्दी सिद्ध हो जाता है।
मंत्र
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई,
गोपद सिंधु अनल सितलाई
जप विधि
- सुबह नहाकर, साफ वस्त्र पहनकर भगवान राम का पूजन करें।
- पूर्व दिशा की ओर मुख करके, कुश के आसन पर बैठें और तुलसी की माला से इस मंत्र का जप करें।
- कम से कम 5 माला का जप अवश्य करें।
- कुछ ही दिनों में आपके शत्रु, मित्र बन जाएंगे।
- मंत्र जप का समय, आसन, आसन एक ही हो तो मंत्र जल्दी सिद्ध हो जाता है।
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