सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

जिन-जिन्नात प्रत्यक्षीकरण सिद्धि.

जिन-जिन्नात प्रत्यक्षीकरण सिद्धि.

प्रयोग-1
अगर आप अपने सपने में जिन्न को बुलाना चाहतें हैं और उससे कोई काम करवाना चाहतें हैं यह आपको 7 दिन करना है. वस्त्र दिशा और माला का कोई बंधन नहीं है. यह साधना आपको रात्रि में ही करना है. इस साधना के तुरंत बाद आपको सो जाना है साधना के बीच में और साधना के बाद भी कोई बातचीत किसी से नहीं करना है. साधना के आखरी दिन जिन्न आपके स्वप्न
में आकर आपसे बात करेगा और आपका कहा हुआ काम कर देगा.
मंत्र :-
।। बिस्मिल्लाह रहेमाने रहिम या खुदा मो हर्फिल ब् हे हज़र शू बा हक इ बा ।।
YA KHUDA MO HARFIL BA’HE HAZAR SHOO BA HAQ E BA
यह मंत्र आपको 505 बार पढ़ना है. सिद्धि मिलने के बाद जब भी आपको कोई काम हो 5 बार पढ़ के सो जाएं. जिन्न स्वप्न में आकर आपसे बार करेगा और आपका काम कर देगा. एक बात और जिन्न से अच्छे काम लें और कभी भी अपने सामने जगाते समय उसको प्रकट होने को न कहें.




प्रयोग-2
जिन-जिन्नातो से कार्यसिद्धि:-
शाबर मंत्र विद्या में जिन्न प्रकट करने का बड़ा अद्धभुत तरीका दिया गया है। बहुत ही सरल मंत्र जिसका अनुष्ठान कोई भी कर सके। इन मंत्र अनुष्ठान से हम जिन्न को अपना गुलाम भी बना सकते है और मित्र भी। तब आप उनको चाहे कैसा भी कार्य बोलोगे वो करेंगे, नॉन स्टॉप करेंगे। पलक झपकते ही। जिन्न क्या क्या कर सकते है।
1. कैसा भी वशीकरण करना हो, पलक झपकते ही वशीकरण पक्का, और उसके लिए जिन्न को नाम और फोटो दिखा दो उसकी, इतना ही बहुत है।
2. कोई दुश्मन अगर परेशान कर रहा हो तो बस आपके इशारे की देर है। दुश्मन दुश्मनी छोड़ देगा।
3. धन के लिए कहाँ पैसा लगाए या अच्छा  जॉब नहीं मिल रहा है या बिज़नेस नहीं चल रहा है तो बस जैसा हुकुम दोगे वैसा ही होगा।
इसके अलावा सभी जगह पर जहां भी आवश्यकता हो सभी जगह पर जिन्न आपकी जितनी सहायता कर सकता है उतनी कोई और नहीं -
मंत्र:-
।। काली काली महाकाली। इन्द्र कि बेटी ब्रह्मा कि साली। बालक कि रखवाली। काले कि जै काली। भैरों कपाली। जटा रातों खेले। चंद हाथ कैडी मठा। मसानिया वीर। चौहटे लड़ाक। समानिया वीर। बज्रकाया। जिह करन नरसिंह धाया। नरसिंह फोड़ कपाल चलाया। खोल लोहे का कुंडा। मेरा तेरा बाण फटक। भूगोल बैढन। काल भैरो बाबा नाहर सिंह। अपनी चौकी बठान। शब्द साँचा। पिंड कांचा। फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा ।।
विधि: २१ शनिवार और रविवार को ये करना है। रात १० बजे के बाद २१ माला जपनी है। जिन्नात प्रकट होगा तब उसको वचनो में बांध लेना है। फिर जैसा कहोगे वैसा वो करेगा।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गुप्त नवरात्रि के दिनों में तांत्रिक साधना

 जाने कैसे किये जाते है गुप्त नवरात्रि के दिनों में तांत्रिक साधना जिससे कोई भी किसी भी कार्य को सफल बना सकता है| अधिकतर लोग वर्ष में आने वाली चैत्र नवरात्रा और आश्विन या शारदीय, दो ही नवरात्रों के बारे में जानते हैं। लेकिन, बहुत कम लोगों को पता होगा कि इसके अतिरिक्त और भी दो नवरात्रा होती हैं जिन्हें गुप्त नवरात्रा कहा जाता है। इन दिनों देवी मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है तथा विभिन्न साधनाए भी उन्हें प्रसन्न करने के लिए की जाती है। तंत्र साधना के अनुसार गुप्त नवरात्रा में अपनाए गए प्रयोग विशेष फलदायक होते हैं और उनका फल भी जल्दी ही प्राप्त किया जा सकता है। जैसा कि गुप्त शब्द से ही विदित होता है कि यह नवरात्रा गुप्त होती है, अतः इस समय किए गए सभी उपाय भी गुप्त ही होने चाहिए।गुप्त एंव काली शक्तियों को प्राप्त करने हेतु यह श्रेष्ठ समय है और इस समय के सदुपयोग के लिए आपके लिए पेश है गुप्त नवरात्रि के तांत्रिक उपाय टोटके–१) तंत्र-मंत्र आरम्भ करने के पहले आप एक कलश की स्थापना करे मां देवी का नाम लेते हुए। देवी मां की मूर्ति को सिंदूर चढ़ाएं, धूप दीप करे, लाल फूल अ...

स्तंभन तंत्र प्रयोग:

स्तंभन तंत्र प्रयोग: स्तंभन क्रिया का सीधा प्रभाव मस्तिष्क पर पड़ता है। बुद्धि को जड़, निष्क्रय एवं हत्प्रभ करके व्यक्ति को विवेक शून्य, वैचारिक रूप से पंगु बनाकर उसके क्रिया-कलाप को रोक देना स्तंभन कर्म की प्रमुख प्रतिक्रिया है। इसका प्रभाव मस्तिष्क के साथ-साथ शरीर पर भी पड़ता है। स्तंभन के कुछ अन्य प्रयोग भी होते हैं। जैसे-जल स्तंभन, अग्नि स्तंभन, वायु स्तंभन, प्रहार स्तंभन, अस्त्र स्तंभन, गति स्तंभन, वाक् स्तंभन और क्रिया स्तंभन आदि। त्रेतायुग के महान् पराक्रमी और अजेय-योद्धा हनुमानजी इन सभी क्रियाओं के ज्ञाता थे। तंत्र शास्त्रियों का मत है कि स्तंभन क्रिया से वायु के प्रचंड वेग को भी स्थिर किया जा सकता है। शत्रु, अग्नि, आंधी व तूफान आदि को इससे निष्क्रिय बनाया जा सकता है। इस क्रिया का कभी दुरूपयोग नहीं करना चाहिए तथा समाज हितार्थ उपयोग में लेना चाहिए। अग्नि स्तंभन का मंत्र निम्न है। ।। ॐ नमो अग्निरुपाय मम् शरीरे स्तंभन कुरु कुरु स्वाहा ।। इस मंत्र के दस हजार जप करने से सिद्धि होती है तथा एक सौ आठ जप करने से प्रयोग सिद्ध होता है। स्तंभन से संबंधित कुछ प्रयोग निम्नलिखित है: 1....

भूत प्रेत पिशाच वशीकरण साधना मंत्र

भूत प्रेत पिशाच वशीकरण साधना मंत्र, आधुनिकता के इस दौर में भी भूत प्रेत, पिशाच, जिन्न और बेताल की अदृश्य शक्तियों के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव से इनकार नहीं किया जा सकता। यह सदियों से इंसान के जीवन में किसी न किसी रूप में बना रहा है। इसका उपयोग वशीकरण के लिए होता आया है। चाहे वह वशीकरण स्त्री-पुरुष के निजी संबंधों में सुधार को लेकर हो, या फिर दूसरे किस्म की बाधाओं को दूर करने के लिए हो। भूत प्रेत पिशाच वशीकरण साधना मंत्र हिदूं और मुस्लिम तंत्र विद्या में इसके मंत्र साधना के कई उपाए बताए गए हैं। वैदिक अनुष्ठान हों या फिर तंत्र-मंत्र की कठिन साधनाएं, उनके जरिए भूत प्रेत या पिशाच की सम्मोहन शक्ति हासिल की जाती है। विभिन्न तरह की साधनाओं में परी साधना, कर्ण पिशाचिनी साधना, किंकरी साधना, बेताल साधना, वीर साधना, डाकिनी साधना मुख्य हैं, जिनके बताए गए आवश्यक विधान-विधान इस प्रकार हैं साधना का विशेष स्थान एकांत और साफ-सुथरा होना चाहिए। गुरु के बगैर साधना अर्थहीन समझा जाता है, इसलिए उनके दिशा-निर्देशें का पालन करते हुए साधना किया जाना चाहिए। साधना में ब्रह्मचर्य का पालन बहुत जरूरी है, तथा...