होली हिंदु धर्म का सबसे मुख्य त्योंहार माना जाता है जिसका शास्त्रों और ज्योतिष में भी विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिष की दृष्टि से होलिका दहन विशेष सिद्धीदायी मानी जाती है .. मान्यता है कि होलिका दहन की रात्रि में किए गए सभी धार्मिक अनुष्ठान सिद्ध होते हैं और इनका उचित फल मिलता है। साथ ही ये भी मान्यता है कि होली की पवित्र अग्नि में सभी तरह के परेशानी, व्याधि और रोग-भय आदी को नाश करने की क्षमता होती है। ऐसे में आज आपको होलिका दहन के किए जाने वाले एक ऐसे ही विशेष प्रयोग के बारे में बता रहा हु,जिसके जरिए आप जीवन की सारी परेशानियों और चिंताओं से मुक्ति पा सकते हैं।
तंत्र शास्त्रों के अनुसार होली की रात्रि का विशेष महत्व होता है। इस दिन किए गए टोने-टोटके, पूजा पाठ या साधना अचूक होते हैं तथा उनका फल तुरंत मिलता है। इस दिन किसी दूसरे के द्वारा किए गए काले जादू को भी तुरंत ही समाप्त किया जा सकता है।
होलिका दहन की रात को तंत्र साधना के लिए बढि़या माना जाता है। इस दिन लोग कई समस्याओं से निजात पाने के लिए तंत्र मंत्र का सहारा लेते हैं। 1 मार्च को शाम में 7 बजकर 37 मिनट पर भद्रा समाप्त हो जाएगा इसके बाद से होलिका दहन किया जाना शुभ रहेगा। वैसे शास्त्रों में बताए गए नियमों के अनुसार इस साल होलिका दहन के लिए बहुत ही शुभ स्थिति बनी हुई है। पूर्णिमा तिथि हो, प्रदोष काल हो और भद्रा ना लगा हो। इस वर्ष होलिका दहन पर ये तीनों संयोग बन रहे हैं। धार्मिक ग्रंथ और शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक के दिनों में किए गए व्रत और किए गए दान से जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है और ईश्वर का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन वस्त्र, अनाज और अपने इच्छानुसार धन का दान करना चाहिए।
आज आपको तीव्र तंत्र बाधा दोष के निवारण हेतु एक गोपनीय तांत्रिक प्रयोग बता रहा हू, जिससे भयंकर से भयंकर तांत्रिक बाधा दोष (काला जादू) समाप्त किया जा सकता है । यह एक आसान सा साधना प्रयोग है और इस प्रयोग के बाद इसका अनुभव किया जा सकता है,यह एक शीघ्र फलदायी साधना है । ऐसा प्रयोग प्राप्त होना ही जीवन मे सौभाग्य माना जाता है,आपके साथ-साथ यह प्रयोग मैं स्वयं भी संपन्न करने वाला हूँ । यह प्रयोग प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए, बड़े से बड़े तांत्रिकों से लेकर एक सामान्य व्यक्ति को भी यह प्रयोग करना आवश्यक है । इससे तांत्रिक बाधा के साथ साथ जीवन मे सफलता प्राप्ति हेतु आनेवाले बाधा का भी नाश होता है ।
साधना सामग्री-पीली सरसों 5-10 ग्राम ।
एक व्यक्ति के लिए 5-10 ग्राम पीली सरसों ठीक है परंतु अगर पुरा परिवार यह साधना करना चाहता है तो ज्यादा पीली सरसों खरीदे,पंसारी के दुकान में आपको पीली सरसों आसानी से मिल जाएगा और यह सस्ता होता है इसलिए चिंता ना करे । एक व्यक्ति का तंत्र बाधा दोष निवारण का खर्च 3-5 रुपये आता है जो ज्यादा नही है ।
साधना विधि-दाहिने हाथ मे पीली सरसों रखे,जितना आप हाथ मे ले सकते हो उतना ही लीजिए,ज्यादा लेने की आवश्यकता नही है वर्णा सरसो हाथ से मंत्र जाप के समय गिरता रहेगा ।
दाहिने हाथ मे पीली सरसों लेकर,उस पर त्राटक करते हुए मंत्र का 36 मिनट तक जाप करे । मंत्र जाप के बाद (सरसो को मुठ्ठी में बंद करे ) अपने सर से लेकर पैरो तक 7 बार मुठ्ठी में बंद पीली सरसों को उतारे और उतारने के बाद सरसो को किसी प्लेट में रख दे । फिर घर से बाहर जाकर प्लेट में रखे हुए सरसो को होलिका में डाल दे,यह प्रयोग रात्रि में 9 बजे के बाद कभी भी कर सकते है । मंत्र जाप के समय जमीन पर आसन डालकर बैठ जाये और जाप करे परंतु सरसो को उतारने के व्यक्त खड़े होकर उतारना है । दिशा,आसन, वस्त्र का कोई बंधन नही है,आपके पास किसी भी रंग की धोती या वस्त्र हो काम चल जाएगा,आसन कोई भी चलेगा और किसी भी दिशा में मुख करके साधना कर सकते हो ।
मंत्र-
।।ह्रीं ह्लीं दुं दुर्गम्च्छेदिन्यै दुं ह्लीं ह्रीं फट ।।
Hreem hleem doom durgamcchedinyai doom hleem hreem phat
मंत्र का उच्चारण साफ-साफ होना जरूरी है और इस प्रयोग के बाद इसका असर पीली सरसों को होलिका में दहन करते ही देखने मिलता है ।
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