सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

मंगला चमारी साधना विधि

इस धरा पर जैसे सभी मनुष्य एक जैसे नहीं है उसी अनुसार धर्म में भी भिन्नता है | लेकिन सभी धर्म मनुष्य को एक ही रास्ता दिखाते है वह है सद्मार्ग पर चलने का | आज हम आपको इस्लाम धरम से जुडी एक ऐसी साधना के विषय में जानकारी देने वाले है जिसके सिद्ध करने पर वह एक स्त्री के रूप में आपके साथ पत्नी रूप में राठी है | मंगला चमारी साधना  एक ऐसी ही साधना है जिसके सिद्ध करने पर जातक मंगला चमारी को पत्नी स्वरुप पाकर सम्पूर्ण सुख की प्राप्ति करता है |

मंगला चमारी साधना में ध्यान देने योग्य :-

मंगला चमारी साधना ऐसे व्यक्ति ही करें जिसकी अभी तक शादी न हुई हो या जिसकी पत्नी का देहांत हो चुका हो या तलाक हो चुका हो | मंगला चमारी साधना सिद्ध होने पर वह पत्नी रूप में जातक के रहती है |

मंगला चमारी साधना विधि :-

  • पश्चिम दिशा की तरफ एक हरा या सफ़ेद आसन बिछाकर उस पर स्नान आदि करके बैठ जाये |
  • मंत्र जप में काले हकीक की माला का प्रयोग करें |
  • इस साधना का समय 21 दिन माना गया है |
  • इस साधना का समय रात्रि के 10 बजे के बाद का माना गया है | इसलिए रात्रि 10 बजे के बाद का एक समय सुनिश्चित करें |
  • साधना के प्रथम दिन उड़द की दाल का आटा बनवाकर इसकी छोटी-छोटी 721 रोटियाँ बनवा ले |
  • प्रथम दिन साधना पूर्ण होने के तुरंत बाद एक पानी वाले कुँए में इस सभी रोटियों को डाल आये | रोटियों को कुँए में डालते समय ऐसा बोले – “अ मंगला चमारी यह तेरा तौसा है, इसे स्वीकार कर ” | इस प्रकार कुँए में सभी रोटियाँ डालने के बाद बिना पीछे मुड़े घर वापिस आ जाये |
  • अगले 2० दिन तक आप बेसन की 721 रोटियाँ बनाकर ठीक पहले दिन की तरह पानी में कुँए में डालकर आयें |
  • इस प्रकार प्रथम दिन उड़द की दाल की रोटियां व बाकी के 20 दिन तक बेसन की रोटियां कुँए में डालकर आयें |
  • साधना में प्रतिदिन 721 मन्त्रों के जप करें | मंत्र इस प्रकार से है : ” अलकरीम क़ादिर मंगला चमारी को कर हाज़िर “|
इस प्रकार उपरोक्त विधि अनुसार मंगला चमारी साधना करने से ठीक 21वें दिन मंगला चमारी आपके सामने प्रत्यक्ष रूप से प्रकट होती है | उसकी कुछ शर्तों को पूर्ण करने के बाद वह पत्नी रूप में जीवन भर जातक का साथ देती है | मंगला चमारी साधना में सफलता प्राप्त करने वाला जातक पत्नी सुख तो प्राप्त करता ही है साथ ही ऐसे व्यक्ति को अपार धन की भी प्राप्ति होती है |
मंगला चमारी साधना को सिद्ध करने की विधि भले ही आसान दिखाई पड़ती हो | किन्तु इसे सिद्ध करने में जातक को बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है |

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गुप्त नवरात्रि के दिनों में तांत्रिक साधना

 जाने कैसे किये जाते है गुप्त नवरात्रि के दिनों में तांत्रिक साधना जिससे कोई भी किसी भी कार्य को सफल बना सकता है| अधिकतर लोग वर्ष में आने वाली चैत्र नवरात्रा और आश्विन या शारदीय, दो ही नवरात्रों के बारे में जानते हैं। लेकिन, बहुत कम लोगों को पता होगा कि इसके अतिरिक्त और भी दो नवरात्रा होती हैं जिन्हें गुप्त नवरात्रा कहा जाता है। इन दिनों देवी मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है तथा विभिन्न साधनाए भी उन्हें प्रसन्न करने के लिए की जाती है। तंत्र साधना के अनुसार गुप्त नवरात्रा में अपनाए गए प्रयोग विशेष फलदायक होते हैं और उनका फल भी जल्दी ही प्राप्त किया जा सकता है। जैसा कि गुप्त शब्द से ही विदित होता है कि यह नवरात्रा गुप्त होती है, अतः इस समय किए गए सभी उपाय भी गुप्त ही होने चाहिए।गुप्त एंव काली शक्तियों को प्राप्त करने हेतु यह श्रेष्ठ समय है और इस समय के सदुपयोग के लिए आपके लिए पेश है गुप्त नवरात्रि के तांत्रिक उपाय टोटके–१) तंत्र-मंत्र आरम्भ करने के पहले आप एक कलश की स्थापना करे मां देवी का नाम लेते हुए। देवी मां की मूर्ति को सिंदूर चढ़ाएं, धूप दीप करे, लाल फूल अ...

स्तंभन तंत्र प्रयोग:

स्तंभन तंत्र प्रयोग: स्तंभन क्रिया का सीधा प्रभाव मस्तिष्क पर पड़ता है। बुद्धि को जड़, निष्क्रय एवं हत्प्रभ करके व्यक्ति को विवेक शून्य, वैचारिक रूप से पंगु बनाकर उसके क्रिया-कलाप को रोक देना स्तंभन कर्म की प्रमुख प्रतिक्रिया है। इसका प्रभाव मस्तिष्क के साथ-साथ शरीर पर भी पड़ता है। स्तंभन के कुछ अन्य प्रयोग भी होते हैं। जैसे-जल स्तंभन, अग्नि स्तंभन, वायु स्तंभन, प्रहार स्तंभन, अस्त्र स्तंभन, गति स्तंभन, वाक् स्तंभन और क्रिया स्तंभन आदि। त्रेतायुग के महान् पराक्रमी और अजेय-योद्धा हनुमानजी इन सभी क्रियाओं के ज्ञाता थे। तंत्र शास्त्रियों का मत है कि स्तंभन क्रिया से वायु के प्रचंड वेग को भी स्थिर किया जा सकता है। शत्रु, अग्नि, आंधी व तूफान आदि को इससे निष्क्रिय बनाया जा सकता है। इस क्रिया का कभी दुरूपयोग नहीं करना चाहिए तथा समाज हितार्थ उपयोग में लेना चाहिए। अग्नि स्तंभन का मंत्र निम्न है। ।। ॐ नमो अग्निरुपाय मम् शरीरे स्तंभन कुरु कुरु स्वाहा ।। इस मंत्र के दस हजार जप करने से सिद्धि होती है तथा एक सौ आठ जप करने से प्रयोग सिद्ध होता है। स्तंभन से संबंधित कुछ प्रयोग निम्नलिखित है: 1....

भूत प्रेत पिशाच वशीकरण साधना मंत्र

भूत प्रेत पिशाच वशीकरण साधना मंत्र, आधुनिकता के इस दौर में भी भूत प्रेत, पिशाच, जिन्न और बेताल की अदृश्य शक्तियों के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव से इनकार नहीं किया जा सकता। यह सदियों से इंसान के जीवन में किसी न किसी रूप में बना रहा है। इसका उपयोग वशीकरण के लिए होता आया है। चाहे वह वशीकरण स्त्री-पुरुष के निजी संबंधों में सुधार को लेकर हो, या फिर दूसरे किस्म की बाधाओं को दूर करने के लिए हो। भूत प्रेत पिशाच वशीकरण साधना मंत्र हिदूं और मुस्लिम तंत्र विद्या में इसके मंत्र साधना के कई उपाए बताए गए हैं। वैदिक अनुष्ठान हों या फिर तंत्र-मंत्र की कठिन साधनाएं, उनके जरिए भूत प्रेत या पिशाच की सम्मोहन शक्ति हासिल की जाती है। विभिन्न तरह की साधनाओं में परी साधना, कर्ण पिशाचिनी साधना, किंकरी साधना, बेताल साधना, वीर साधना, डाकिनी साधना मुख्य हैं, जिनके बताए गए आवश्यक विधान-विधान इस प्रकार हैं साधना का विशेष स्थान एकांत और साफ-सुथरा होना चाहिए। गुरु के बगैर साधना अर्थहीन समझा जाता है, इसलिए उनके दिशा-निर्देशें का पालन करते हुए साधना किया जाना चाहिए। साधना में ब्रह्मचर्य का पालन बहुत जरूरी है, तथा...