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भैरव अष्टमी से शत्रु नाश

भैरव अष्टमी से शत्रु नाशः शत्रु की बढ़ी हुई परेशान करने वाली हरकतों को भैरव अष्टमी से खत्म किया जा सकता हैं। भौरव मंदिर में इसे शत्रु मुक्ति के लिए किया जाता है। इसके लिए शत्रु का नाम एक छोटे से एक सफेद कागज पर भैरव मंत्र का जाप करते हुए लिखें। उसे एक शहद की शीशी में डुबोने के बाद ढक्कन बंद कर भैरव मंदिर या शनि मंदिर में गाड़ देने से न केवल शत्रु की उछल-कूद बंद हो जाती है, बल्कि उसे भी भारी क्षति होती है। इसके लिए उपयोग में आया मंत्र हैः-
ओम क्षौं क्षौं भैरवाय स्वाहा!
इस उपाय को भैरव अष्टमी के अतिरिक्त कृष्ण पक्ष द्वितीया को पड़ने वाले गुरुवार या शनिवार को किया जा सकता है।भैरो मंत्र के उपायः शत्रु का नाश करना हो या फिर अपनी सुरक्षा पुख्ता करनी हो, उसके लिए श्री वीर भैरो मंत्र बहुत उपयोगी साबित हो सकते हैं। यहां शत्रु नाश से मतलब किसी की शत्रुता के खात्मे से है। इसके लिए मंगलवार या शनिवार को किए जाने वाले उपाय के तहत सवा किलोग्राम बूंदी के लड्डु, नारियल, अगरबत्ती और लाल फूल की माल से श्रीवीर अर्थात हनुमान की पूजा करें। उसके बाद नीचे दिए गए मंत्र का सात बार जाप का पूजा करें। इस सात मंगलवार या शनिवार को करने से लाभ मिलता है।

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