शत्रु वशीकरण मंत्रः हमें जो सतावे, सुख न पावे सातो जनम,
ठतनी अर्ज सुन लीजे, वीर भैरा, आज तुम।
जितने हाए शत्रु मेरे, और जो सताए मुझे।
वाही का रक्त-पान, स्वान कराओ।
मार मार खण्डन से , कांत डारो माथ उनके।
कालका भवानी, सिंह डारे माथ उनके।
कालका भवानी, सिंह-वाहिनी की छोड़।
मैंने करी आस तेरी, अब करो काज इतनो तुम।
शत्रु वशीकरण टोटके आसान उपाय
- कई बार शुत्रु अनावश्क तरीके से परेशान करता है। या कहें कि जानबूझ कर नीचा दिखाने और कमजोर बनाने के लिए किसी के द्वारा तंग किए जाने की स्थिति में सूर्योदय से पहले एक नींबू को चार भागों में काट लें। उसे अपने हाथ में लेकर ईष्ट देव को आराधना करते हुए गायत्री मंत्र का 11 बार जाप करें और शत्रु से मुक्ति के साथ-साथ दिनभर के सारे कार्य बाधारहित पूर्ण होने की मनोकामना करें। प्रत्येक भाग को एक-एक कर चारो दिशाओं में किसी चैराहे या खुले मैदान में फेंक दें और शांत भाव से वापस घर आकर रोजमर्रे कामकाज में जुट जाएं।
- शुक्ल पक्ष के किसी भी बुधवार को गोमती चक्र अपने सिर के चारो ओर घुमाकर फेंक देने से शुत्रु द्वारा किया गया नुकसान पहुंचाने वाला जादू-टोना या तंत्रिक प्रयोग खत्म हो जाता है।
- सफलता से ईष्र्या करने वाले शत्रु के द्वारा किए गए तांत्रिक प्रभाव को खत्म करने के लिए शनिवार के दिन एक किलो काले उड़द को एक किलो कोयले या चारकोल के साथ मिलाकर एक मीटर काले कपड़े में बंधकर अपने सिर के ऊपर से हनुमान का ध्यान कर 21 बार घुमाएं। उसके बाद उसे नदी के बहते पानी में विसर्जित कर दें। ऐसा सात शनिवार करने से दुश्मन का दुष्प्रभाव हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।
- हाथ से निर्मित कागज के टुकड़े पर लाल चंदन से शत्रु का नाम लिखकर उसे शहद में तब तक डूबोए रखें, जबतक आपको ऐहसास नहीं हो जाए कि शत्रु द्वारा की जाने वाली अनावश्यक तरह से परेशानी खत्म हो गई है। इस प्रयोग से शत्रु को अपने वश में किया जा सकता है और उसे अपना पक्षधर बनाया जा सकता है।
- शत्रु यदि कोई स्त्री है तो उसे वशीभूत कर उसकी शुत्रुता को खत्म करने के लिए छोटी इलायची, लाल चंदन, सिंदूर, कंगनी, ककड़सिंगी आदि से धूप या हवन-समाग्री बनाएं। इससे उस शत्रु जैसा वर्ताव करने वाली स्त्री के नाम से प्रतिदिन धूप जलाने से चंद दिनों में ही अच्छे परिणाम आ जाता है।
- यदि आप चाहते हैं कि जो व्यक्ति आपसे शत्रुता का व्यावहार करता है उसके स्वाभाव में परिवर्तन आ जाए और आपसे मित्रवत अचरण बना ले तो इसके लिए बैजयंति माला धारण करना चाहिए। इस माला में किसी को भी सम्मोहित करने की अद्भुत क्षमता होती है। भगवान श्रीकृष्ण हमेश यही माल पहना करते थे
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