हिन्दू धर्म शास्त्रों में जन्म, मृत्यु आदि के जुड़े कई संस्कार को बताया गया है। व्यक्ति के जन्म से लेकर उसकी मृत्यु के बीच तक के सफर में उसे कई संस्कार से गुजरना पड़ता है। इस धर्म में व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी कई संस्कार अहमियत रखते हैं। इन्ही परम्पराओं में से एक है मौत के बाद मृतक का सिर हमेशा दक्षिण दिशा में रखा जाता है, लेकिन आप जानते हैं कि आखिर क्यों मृत व्यक्ति का सिर इसी दिशा में रखते हैं।माना जाता है कि जिस प्रकार लोग कपड़े बदलते है उसी प्रकार आत्मा शरीर बदलती है। शरीर तो नष्ट हो जाता है, लेकिन आत्मा नहीं। व्यक्ति के शरीर का अंत उसकी मृत्यु के साथ ही हो जाता है।शास्त्रों के अनुसार मृत व्यक्ति का सिर दक्षिण दिशा में इसीलिए रखते हैं, क्योंकि उसके प्राणों का त्याग दसवें द्वार से हो।ऐसा माना जाता है कि मरने के बाद भी कुछ समय तक प्राण व्यक्ति के मस्तिष्क में रहते हैं। इसीलिए उत्तर दिशा में सिर रखने से ध्रुवाकर्षण के कारण प्राण शीघ्र निकल जाते हैं।इसी वजह से मृतक का सिर हमेशा दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है।
जाने कैसे किये जाते है गुप्त नवरात्रि के दिनों में तांत्रिक साधना जिससे कोई भी किसी भी कार्य को सफल बना सकता है| अधिकतर लोग वर्ष में आने वाली चैत्र नवरात्रा और आश्विन या शारदीय, दो ही नवरात्रों के बारे में जानते हैं। लेकिन, बहुत कम लोगों को पता होगा कि इसके अतिरिक्त और भी दो नवरात्रा होती हैं जिन्हें गुप्त नवरात्रा कहा जाता है। इन दिनों देवी मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है तथा विभिन्न साधनाए भी उन्हें प्रसन्न करने के लिए की जाती है। तंत्र साधना के अनुसार गुप्त नवरात्रा में अपनाए गए प्रयोग विशेष फलदायक होते हैं और उनका फल भी जल्दी ही प्राप्त किया जा सकता है। जैसा कि गुप्त शब्द से ही विदित होता है कि यह नवरात्रा गुप्त होती है, अतः इस समय किए गए सभी उपाय भी गुप्त ही होने चाहिए।गुप्त एंव काली शक्तियों को प्राप्त करने हेतु यह श्रेष्ठ समय है और इस समय के सदुपयोग के लिए आपके लिए पेश है गुप्त नवरात्रि के तांत्रिक उपाय टोटके–१) तंत्र-मंत्र आरम्भ करने के पहले आप एक कलश की स्थापना करे मां देवी का नाम लेते हुए। देवी मां की मूर्ति को सिंदूर चढ़ाएं, धूप दीप करे, लाल फूल अ...
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