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जन्मकुंडली में राहु के शुभ और अशुभ प्रभाव

राहु चन्द्र का पति है | अंग्रेजी में इसे यानि सांप के फन की संज्ञा दी है | ज्योतिष में इसे शनि का एजेंट भी कहा गया है | शनि एक लम्बा चौड़ा सांप है और राहु उसका फन है | इससे जाहिर होता है कि राहु दुष्ट छाया गृह है |राहु का रंग नीला है | नीला आकाश और नीला समुद्र – दोनों राहु के अधिकार में है | ब्रहस्पति के हक़ में हवा या पंख है जो नीचे से ऊपर और ऊपर से नीचे प्रवाहमान है | ब्रहस्पति के साथ बारहवें घर में राहु भी हो तो वह ब्रहस्पति से बलवान हो जाता है | तब ब्रहस्पति पूर्णतया गृहस्थाश्रमी मनुष्य बन जाता है | राहु उसे ऊंचाइयों को छूने नहीं देता | राहु इतना शक्तिशाली गृह है कि सारा संसार उसके चरणों में झुका हुआ है |जब तक चौथा घर पीड़ित नहीं होता तब तक राहु अशुभ फल नहीं देता | जब मंगल 9-12 घर में हो , सूर्य और बुध तीसरे घर में हों या राहु स्वयं चौथे में बैठा हो तो राहु शुभ फल देता है | जब राहु का बुध से युति संबंध हो तब तक राहु शुभ ही रहता है | राहू शनि के घरों से पहले घरों में हो तो शनि उसके आदेशानुसार फल देता है | यह चन्द्र को पीड़ित करता है किन्तु जब ये दोनों एक ही घर में बैठे हो तब ऐसा नहीं होता | यदि राहु अशुभ दुष्ट हुआ तो उसके फल जातक को उसकी आयु के 42 वर्षों तक सहने पड़ते है |जब सूर्य और शनि किसी घर में साथ-साथ गोचरवश आते है तब राहु अत्यंत दुष्ट और अशुभ बन जाता है | ऐसी स्थिति में मंगल भी अशुभ हो जाता है | यदि राहु अपने शत्रुओं – सूर्य , मंगल , शुक्र के साथ-साथ केतु पर भी द्रष्टि डाले तो जातक के पुत्रों के लिए अनिष्टकारी होता है | इतना ही नहीं केतु से सम्बंधित सभी चीज़े भी प्रभावित होती है | जिसे घर में राहु सूर्य से युक्त या दुष्ट होगा उस घर के फल को विकृत कर देगा | जब राहु का दुष्प्रभाव होता है तब जातक के दक्षिण द्वार से बड़े-बड़े अनर्थ होते है | अतः घर का द्वार कभी भी दक्षिण की ओर नहीं होना चाहिए |ग्रहों के 35 वर्षीय कालचक्र में राहु को 6 वर्ष दिए है | सरस्वती राहु की अधिष्ठात्री देवी है | सीसा इसकी धातु है | जौं, सरसों, मूली इसके खाद्य पदार्थ है | स्मृति एवं कल्पना इसके गुण है | बिजली के यंत्र, मशीनें, नीला रंग , शौचालय, चिमनी , पैंट -पजामें, राहु के आधिपत्य में रहते है | सास -ससुर और माता का कारक राहु है | राहु के अशुभ फल से बचने के लिए ये कार्य अवश्य करें : –
  • माँ सरस्वती की रोजाना पूजा करें |
  • बिजली से चलने वाले उपकरण , नीले रंग के कपड़ें किसी से मुफ्त में भी न लें |
  • कन्या दान करें |
  • तम्बाकू का सेवन बिल्कुल भी न करें |

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